भक्ति का महत्व
"भक्ति का महत्व"
भौतिक सुविधाएं होने पर यदि कोई व्यक्ति भक्ति नहीं करता है तो खराब पूर्व जन्मों की की गई भक्ति का फल प्राप्त करता है आज अगर आप सत भक्ति नहीं करते हो तो 84 की योनियों में पढ़कर आपको कुत्ता गधा बनना पड़ेगा।
सत भक्ति अपनाए,
चौरासी से छुटकारा पाये।
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भक्ति से आर्थिक मानसिक और शारीरिक सुख होता है भक्ति करना अति आवश्यक है भक्ति करने से सांसारिक सुख प्राप्त होते ही हैं और साथ में मोक्ष प्राप्ति भी होती है।
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"सद्भक्ति के लक्षण"
"सत भक्ति अपनाएं अपना जीवन सफल बनाएं"
1.सत भक्ति से रोग नाश होता है।
2.सत भक्ति से असाध्य बीमारियों का इलाज भी संभव है।
3. भक्ति करने से हमारे विकारो में शुद्धता आती है और आत्मा भी पवित्र हो जाती हैं।
4.जन्म मरण के चक्कर से छूटने के लिए सत भक्ति जरूरी है।
5. सत भक्ति करने से अहंकार से दूर होकर मनुष्य नेक इंसान बन सुखी जीवन व्यतीत करता है।
6.सत भक्ति से मनुष्य को इस जीवन में सुख मिलता है और मृत्यु के पश्चात सही ठिकाना (निजस्थान)प्राप्त हो जाता है।
7. भक्ति से इंसान को नई दिशा मिलती है नहीं तो वह पशु के समान होता है।
8. सत भक्ति करने से परमात्मा की प्राप्ति होती है और वह आत्मा वापिस इस मृत्युलोक में कभी नहीं आती है।
9.सत भक्ति करने से नशे की बुरी लत छूट जाती है और मानव जीवन धन्य हो जाता है।
10. मनुष्य का सच्चा साथी परमात्मा ही है जिसकी भक्ति करने से सारे कष्ट हो दुख दूर हो जाते हैं।
नोट :-आज के समय इस पूरी दुनिया में संत रामपाल जी महाराज के अलावा पूर्ण संत कोई नहीं है।
सभी शास्त्रों से प्रमाणित सत भक्ति देने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ संत रामपाल जी के पास है।
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